भुवनेश्वर : ओडिशा उच्च न्यायालय (Odisha High Court) ने जिला कलेक्टर संबलपुर (District Collector of Sambalpur) को दो दशक पहले बर्खास्त किये गये एक कर्मचारी को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता ने पहले तत्कालीन राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण में बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती दी थी। प्राधिकरण ने 2002 में एक आदेश में फैसला सुनाया था कि "यह उम्मीद की जाती है कि उसे कलेक्टर या मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी के तहत किसी पद पर समायोजित करना संभव होगा।" हालांकि, संबंधित अधिकारियों ने विभागों के पास वाहनों की कमी के कारण याचिकाकर्ता को फिर से नौकरी पर नहीं रखा। न्यायमूर्ति दीक्षित कृष्ण श्रीपाद और न्यायमूर्ति चित्तरंजन डैश की खंडपीठ ने जिला प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा, "लेकिन हम यह समझने में असफल हैं कि इन सभी वर्षों में याचिकाकर्ता को ड्राइवर के किसी भी पद या किसी ग्रुप-डी पद पर क्यों समायोजित नहीं किया जा सका। यह किसी नागरिक की वैध उम्मीद को खत्म करने का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा "मामले का न्याय मुआवजे/क्षतिपूर्ति के भुगतान की मांग करता है, जिसे हम नियुक्ति के निर्देश के बदले में पांच लाख रुपये तय करते हैं। हमने यह भी नोट किया कि जब से प्राधिकरण ने आदेश दिया है, तब से बहुत समय बीत चुका है। जिला कलेक्टर को याचिकाकर्ता को छह सप्ताह के भीतर पांच लाख रुपये की एकमुश्त राशि का भुगतान करने के लिए एक परमादेश (रिट ऑफ मैंडमस) जारी किया जाता है, ऐसा न करने पर देरी के लिए प्रति दिन 500 रुपये की अतिरिक्त राशि देनी होगी। अतिरिक्त शुल्क कानून के अनुसार दोषी अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूल किया जा सकता है।"



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Tue, Feb 03 , 2026, 01:57 PM