Late Night : क्या आप रात में जागते हैं? यह एक गंभीर समस्या हो सकती है….

Mon, Jan 19 , 2026, 10:16 PM

Source : Uni India

Good Health : अच्छी सेहत के लिए पूरी रात की नींद भी बहुत ज़रूरी है, लेकिन अगर आपकी रात की नींद बार-बार टूटती है, तो इसे नॉर्मल समस्या न समझें। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन में छपी एक नई स्टडी के मुताबिक, रात में बार-बार नींद टूटने से दिल की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो कई खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रिसर्च के मुताबिक, हर व्यक्ति को रात में कम से कम 7 से 8 घंटे सोना ज़रूरी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन (National Library of Medicine) में छपी एक स्टडी के मुताबिक, जिन लोगों को लगातार नींद आने में दिक्कत होती है, उन्हें हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) का खतरा रहता है। नींद में खलल पड़ने से शरीर को पूरी तरह से रिपेयर होने का मौका नहीं मिलता, जिससे दिल के काम करने का तरीका प्रभावित होता है।

रिसर्च से यह भी पता चला है कि बार-बार नींद टूटने का असर दिमाग पर भी पड़ सकता है। अगर रात में आपकी नींद कई बार टूटती है, तो इसका मतलब है कि सोने के बाद भी दिमाग ज़्यादा एक्टिव रहता है। इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि आप बहुत ज़्यादा सोचते हैं या किसी बात को लेकर मेंटल स्ट्रेस में रहते हैं। अगर मेंटल स्ट्रेस है, तो ज़ाहिर है इसका असर दिल पर भी पड़ता है। क्योंकि हार्ट अटैक का एक कारण मेंटल स्ट्रेस भी है। ऐसे में अपनी हेल्थ का ध्यान रखना ज़रूरी है और अगर आपको रात में बार-बार नींद टूटने की प्रॉब्लम है, तो डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ।

कुछ लोगों को खास तौर पर ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत होती है। रात में गहरी नींद के दौरान हार्ट रिलैक्स रहता है और ब्लड प्रेशर नॉर्मल लेवल पर रहता है, लेकिन जब नींद बार-बार टूटती है, तो हार्ट पर प्रेशर बढ़ता है। इससे इन्फ्लेमेशन हो सकती है, जिससे बाद में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग दिन में 23 बार नींद की प्रॉब्लम की शिकायत करते हैं, उनमें हार्ट की बीमारी का खतरा 30 परसेंट बढ़ जाता है। इंसोम्निया या नींद न आना आज एक आम लेकिन सीरियस प्रॉब्लम है। इसके पीछे कई मेंटल, फिजिकल और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण हैं। लगातार स्ट्रेस, एंग्जायटी, डिप्रेशन और काम के प्रेशर से दिमाग शांत नहीं रहता, जिससे नींद नहीं आती। दिमाग के लगातार सोचने की वजह से शरीर को आराम नहीं मिलता। सोने से पहले मोबाइल फोन, टीवी, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का ज़्यादा इस्तेमाल करने से उनसे निकलने वाली ब्लू लाइट स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन के प्रोडक्शन में रुकावट डालती है, जिससे नींद देर से आती है। खराब लाइफस्टाइल की आदतों से भी नींद की दिक्कतें होती हैं। रात में देर से सोना, सोने का समय अनियमित होना, देर से या भारी खाना खाने से पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं और शरीर बेचैन हो सकता है। 

चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले ड्रिंक्स का ज़्यादा सेवन करने से दिमाग एक्टिव रहता है। साथ ही, शराब पीने या स्मोकिंग करने से नींद की क्वालिटी कम हो जाती है। अगर आप दिन भर एक्सरसाइज या फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं, तो शरीर थकता नहीं है, इसलिए आपको रात में नींद नहीं आती है। कभी-कभी नींद न आने के पीछे हेल्थ से जुड़े कारण भी हो सकते हैं। एसिडिटी, पेट दर्द, सांस लेने में दिक्कत, हार्मोनल इम्बैलेंस, थायरॉइड की दिक्कतें या पुराना दर्द नींद में खलल डाल सकता है। बढ़ती उम्र, महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से भी नींद की दिक्कतें हो सकती हैं। अगर नींद की दिक्कतें लंबे समय तक बनी रहें, तो थकान, चिड़चिड़ापन, कॉन्संट्रेशन की कमी और सेहत बिगड़ने लगती है। इसलिए, समय पर सही रूटीन, स्ट्रेस-फ्री लाइफस्टाइल, स्क्रीन का कम इस्तेमाल और ज़रूरत पड़ने पर एक्सपर्ट की सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।

इन लोगों के लिए खतरनाक….
स्लीप एपनिया वाले लोग

जो लोग मेंटल स्ट्रेस में रहते हैं

जो लोग रात में मोबाइल या टीवी देखते हैं

इस रिस्क से कैसे बचा जा सकता है?
सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाए रखें

हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें

रात में चाय या कॉफी न पिएं

मेंटल स्ट्रेस न लें

इससे बचने के लिए योग करें

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