Indian Post Office: भारतीय डाकघर द्वारा 'पंजीकृत मुद्रित पुस्तकें' पार्सल सेवा अचानक बंद (parcel service) कर दिए जाने से देश भर के लाखों पुस्तक विक्रेताओं को भारी नुकसान हुआ है। डाकघर के इस निर्णय से पुस्तकों की ऑनलाइन खरीद महंगी हो जाएगी। देश भर के पुस्तक विक्रेता डाकघर से इस सेवा को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि डाकघर द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के 'मुद्रित पुस्तकें पंजीकृत करें' सेवा बंद करने से पुस्तक विक्रेताओं में असमंजस का माहौल पैदा हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारतीय डाकघर (Indian Post Office) की 'रजिस्टर प्रिंटेड बुक्स' सेवा अपेक्षाकृत सस्ती थी। देश भर के कई पुस्तक विक्रेताओं ने पाठकों तक पुस्तकें भेजने के लिए इस सेवा का उपयोग किया। 'रजिस्टर प्रिंटेड बुक्स' सेवा का नाम बदलकर अब 'बुक पोस्ट' कर दिया गया है तथा इसकी दरें भी बढ़ा दी गई हैं। इससे पहले 'रजिस्टर प्रिंटेड बुक्स' (Register Printed Books) सेवा के जरिए 2000 ग्राम तक वजन वाली मुद्रित पुस्तकें 30 रुपये में भेजने की सुविधा थी। अब नई सेवा 'बुक पोस्ट' के जरिए 500 ग्राम वजन वाली किताब मात्र 30 रुपये में भेजी जा सकेगी। पुस्तक विक्रेता अमोल पाटकर ने हमारा महानगर को बताया कि, जिस पुस्तक के पार्सल की कीमत 30 रुपये थी, उसकी कीमत अब 62 रुपये होगी।
इलेक्ट्रॉनिक मनीऑर्डर के माध्यम से अभी रु. भेजें। 10 हज़ार!
डाक विभाग ने अपनी कुछ सेवाओं के नाम बदल दिए हैं। कुछ सेवाएँ बाधित हुई हैं। सेवा का नाम ‘वीपीपी (VAS) सेवा’ बदलकर सीओडी-रिटेल कर दिया गया है। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मनीऑर्डर के जरिए 5,000 रुपये तक भेजे जा सकते थे। अब इसकी अधिकतम सीमा बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। भारतीय पोस्टल ऑर्डर (Indian Postal Orders) पहले 0.50 पैसे, 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये, 7 रुपये, 10 रुपये, 20 रुपये, 50 रुपये, 100 रुपये के मूल्यवर्ग में उपलब्ध थे। अब यह संख्या घटकर मात्र 100 रुपये रह गई है। 10 रु. 20 रु. 50 एवं रु. यह केवल 100 के मान में ही उपलब्ध होगा।



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Wed, Dec 18 , 2024, 07:28 PM