बंगलादेश: चार सप्ताह में 42 पुलिसकर्मियों समेत 580 लोगों की मौत

Mon, Aug 12 , 2024, 01:53 AM

Source : Uni India

ढाका। बंगलादेश में कोटा सुधार आंदोलन (Bangladesh in the quota) और उसके बाद व्यापक सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों (anti-government violent) में करीब चार सप्ताह में यानी 16 जुलाई से छह अगस्त तक 42 पुलिस अधिकारियों समेत कम से कम 580 लोग मारे गए। स्थानीय बांगला दैनिक ‘प्रोथोम एलो (Prothom Alo)’ की रिपोर्ट के अनुसार 16 जुलाई से छह अगस्त के बीच कोटा सुधार अभियान और उसके बाद के विरोध प्रदर्शनों के परिणामस्वरूप 542 मौतें हुईं। इनमें से 216 मौतें 16 जुलाई से तीन अगस्त के बीच हुईं, जबकि शेष 326 मौतें चार से छह अगस्त के बीच हुईं।

छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह के कारण शेख हसीना (Sheikh Hasina) ने पांच अगस्त को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर भारत चली गईं। इसके बाद आठ अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ ली। देश में चार से छह अगस्त के बीच, अवामी लीग, जुबो लीग, स्वेचसेबक लीग और छात्र लीग के कम से कम 87 नेता और कार्यकर्ता मारे गए। पीड़ितों में कम से कम 36 पुलिस अधिकारी थे। पुलिस महानिरीक्षक मोइनुल इस्लाम ने रविवार को पुष्टि की कि 16 जुलाई से छह अगस्त के बीच 42 पुलिस अधिकारी मारे गए।

अवामी लीग के नेताओं को ढाका और अन्य जगहों पर चार अगस्त को अग्नेयास्त्रों और स्थानीय रूप से प्राप्त हथियारों से प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखा गया हालांकि, विरोध प्रदर्शनों के व्यापक पैमाने के कारण वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए। इस दिन, देश भर में कम से कम 111 मौतें दर्ज की गईं। उनमें से कम से कम 27 अवामी लीग के सदस्य थे। नरसिंगडी के माधबडी में प्रदर्शनकारियों को अवामी लीग की रैली के दौरान गोली मार दी गई। प्रदर्शनकारियों ने आवामी लीग के सदस्यों का पीछा किया और उनमें से छह को मार डाला, जिनमें चारदीघलदी यूनियन परिषद के अध्यक्ष देलोवर हुसैन भी शामिल थे।

सुश्री हसीना ने पांच अगस्त को जब देश छोड़ दिया, तब कई आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमले किये गये और उनके घरों में आग लगा दी गई। अगले दिन हिंसा फिर से शुरू हो गई, जिसके परिणामस्वरूप कई मौतें हुईं। पांच अगस्त को 108 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 49 आवामी लीग के सदस्य थे। छह अगस्त को 107 लोग मारे गए, जिनमें पार्टी के 11 लोग शामिल थे। पूर्व वामी लीग विधायक एवं पूर्व योजना मंत्री एमए मन्नान ने फोन पर प्रोथोम एलो से कहा “ छात्रों, राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों की हत्याओं ने एक नागरिक के तौर पर मुझे बहुत दुख पहुंचाया है। राजनीतिक दलों को राजनीति के भविष्य की खातिर हिंसा से बचने के लिए एक समझौता करना चाहिए।”

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