International Law: एकतरफा पर्यावरणीय उपाय व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए खतरनाक: बिरला

Fri, Jul 12 , 2024, 08:26 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

सेंट पीटर्सबर्ग। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) ने एकतरफा पर्यावरणीय उपाय को व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) के लिए खतरनाक बताया है और कहा है कि भारत जलवायु परिवर्तन (India Climate Change) को रोकने की दिशा में कारगर कदम उठाते हुए अपने एनडीसी (NDC) को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।


श्री बिरला ने रूस के सेंट पीटर्सबर्ग (St. Petersburg) में आयोजित 10वें ब्रिक्स संसदीय मंच में भारतीय संसदीय शिष्टमंडल (Indian Parliamentary Delegation) का नेतृत्व करते हुए यह बात कही। उन्होंने ये बातें शुक्रवार को ‘बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के विखंडन को रोकने और वैश्विक संकट के परिणामों से संबंधित चुनौतियों से निपटने में संसदों की भूमिका’ विषय पर पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि सतत विकास में हालांकि पर्यावरण संरक्षण शामिल है, लेकिन विभिन्न देशों के अलग-अलग आर्थिक विकास स्तरों को ध्यान में रखते हुए इस लक्ष्य को न्यायसंगत तरीके से प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “पर्यावरण संबंधी कार्रवाईयों के रूप में उचित ठहराए जाने वाले एकतरफा उपायों से व्यापार प्रभावित हो रहा है, विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय कानून, समानता और यूएनएफसीसीसी (United Nations Framework Convention) और एनडीसी (National Development Councils) के सिद्धांत कमजोर हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए पर्याप्त संसाधन आवश्यक होते हैं। विकासशील देशों को अपने विकास की जरूरत होती है। इस संबंध में भारत अनुकूलन को प्राथमिकता दे रहा है और अपने एनडीसी को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।” लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा, “संसदें वित्तीय और आर्थिक संप्रभुता की रक्षा के लिए कानून बनाने और अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों के कार्यान्वयन का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”

उन्होंने कहा कि भारतीय संसद विश्व व्यापार संगठन के तहत एक नियम-आधारित, भेदभाव रहित, मुक्त, निष्पक्ष, समावेशी, न्यायसंगत और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का समर्थन करती है और अंतर-संसदीय गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती है। उन्होंने कहा कि भारत की संसद अन्य देशों के सांसदों के साथ गहन संवाद के लिए प्रतिबद्ध है। सतत विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, “प्रति व्यक्ति ऊर्जा के कम उपयोग और 1850 से 2019 के बीच वैश्विक संचयी उत्सर्जन में केवल चार प्रतिशत के न्यूनतम हिस्से के साथ भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को प्राथमिकता दे रहा है।”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सीमित संसाधन होने के बावजूद भारत पर्यावरण को बचाने की दिशा में लगातार ठोस कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा, “ संरक्षण तथा संयम की अपनी समृद्ध परंपरा के अनुसार भारत सतत विकास के लक्ष्यों का समर्थन करता है और इस बारे में अपनी जिम्मेदारियों को समझता है। भारत जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली को बढ़ावा दे रहा है। यूएनएफसीसीसी को किए गए वायदे के अनुसार भारत ने उत्सर्जन तीव्रता को कम करने, गैर-जीवाश्म ईंधन से उत्पादित विद्युत क्षमता बढ़ाने और अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने के अपने लक्ष्यों को पार कर लिया है।”

श्री बिरला ने कहा कि जलवायु से जुड़े मुद्दों का समाधान यूएनएफसीसीसी ढांचे के भीतर रहकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “वैश्विक निकायों में समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप सुधार लाना आवश्यक है।” उन्होंने कहा कि हाल ही में ब्रिक्स में हुए विस्तार से एक अनूठा अवसर प्राप्त हुआ हैॉ। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ब्रिक्स देश अपने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख वाहक बने रहेंगे।

श्री बिरला ने फरवरी 2024 में अबू धाबी में आयोजित विश्व व्यापार संगठन के 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के विखंडन से बचने और व्यापार से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापार संगठन की चर्चाओं में महिलाओं और एमएसएमई जैसे गैर-व्यापारिक मुद्दों को शामिल करने से अधिक विखंडन हो सकता है, क्योंकि इन मुद्दों को अन्य प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बैठकों में उठाया जाता है।

श्री बिरला ने कहा, “विकसित देशों द्वारा उठाए गए कई कदमों से बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों के तहत अधिकारों और दायित्वों का संतुलन बिगड़ रहा है। यह समानता और सामान्य परंतु विभेदित उत्तरदायित्वों एवं संबंधित क्षमताएँ (CBRD-RC) के सिद्धांतों का उल्लंघन है। वास्तव में दुबई में सीओपी28 में यह स्वीकार किया गया था कि जलवायु परिवर्तन को रोकने और सतत आर्थिक विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों का इस्तेमाल मनमाने व्यापार प्रतिबंधों को सही ठहराने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

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