Decision reserved: चार लोगों के हत्यारे की फांसी की सजा पर सुनवाई पूरी, निर्णय सुरक्षित

Fri, Jul 05 , 2024, 08:10 AM

Source : Uni India

नैनीताल। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून (Capital Dehradun) में लगभग दस साल पहले दीपावली के दिन अपने परिवार के चार लोगों की निर्मम हत्या करने वाले हरमीत की सजा-ए-मौत के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) ने शुक्रवार को सुनवाई पूरी कर ली है और निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

न्यायमूर्ति ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई। मामला देहरादून के कैंट थाना के आदर्श नगर का है। यहां वर्ष 2014 में 23 अक्टूबर को एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या की सनसनीखेज घटना सामने आयी थी। चाकू से गोद कर चारों की बेहद निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी गयी थी। सभी के शरीर पर चाकू के 85 निशान थे।

हत्या का आरोप हरमीत पर लगा था। आरोप है कि हरमीत ने संपत्ति विवाद में अपने जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, गर्भवती बहिन हरजीत कौर, भांजी सुखमणि की रात में सोते हुए निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी थी। इस घटना में उसका भांजा कंवलजीत किसी तरह से बच निकलने में कामयाब हो गया था।बताया जा रहा है कि कंवलजीत की गवाही इस मामले में अहम साबित हुई। यह भी आरोप है कि हरमीत अपने पिता से नाराज था और उसे शक था कि उसके पिता पूरी संपत्ति को उसकी बहन के नाम कर देगा। वह पहले भी अपने परिवार को जान से मारने की धमकी दे चुका था।

अगले दिन जब घर में काम करने वाली नौकरानी आयी तो इस घटना की खबर लग पायी। उसने आस पड़ोस के लोगों को इस घटना की जानकारी दी। मृतक जय सिंह के भाई अजीत सिंह ने पुलिस को घटना की सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो मौके पर खूब बिखरा पड़ा हुआ था। अलग-अलग कमरों में चारों के शव पड़े थे। आरोप है कि पुलिस से बचने के लिये हरमीत ने अपने को भी घायल कर लिया था। पुलिस ने हत्या के शक में उसे गिरफ्तार कर लिया। साथ ही शवों को कब्जे में लेकर उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया।

इस मामले में पुलिस ने कई अहम सुबूत पेश किये। लंबे चले मामले के बाद देहरादून के अपर जिला जज (पंचम) आशुतोष मिश्रा की अदालत ने पांच अक्टूबर, 2021 को इस घटना को जघन्य मानते हुए आरोपी को फांसी की सजा सुना दी और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। साथ ही अदालत ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिये उच्च न्यायालय को भेज दिया। तब से यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित था। देखना है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।

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