अल अक्सा मस्जिद क्या है! हमास या इजराइल, किसके हाथ में है अल अक्सा मस्जिद की कमान?

Mon, Oct 23 , 2023, 11:41 AM

Source : Hamara Mahanagar Desk

इजराइल।  हमास ने इजराइल के खिलाफ जंग को नाम दिया है ऑपरेशन अल अक्सा (Operation Al-Aqsa). बता दें कि अल अक्सा एक मस्जिद के स्वरूप में आज दुनिया के सामने है लेकिन इस पर दावा यहूदी भी करते हैं. दुनिया की तीसरी सबसे पवित्र मस्जिद (holiest mosque) कहा जाने वाला यह ऐतिहासिक पूजा स्थल (historic place of worship) इजराइल के प्राचीन शहर यरूशलम में स्थित है. पर, इस पर इजराइल का नियंत्रण नहीं है. इसकी व्यवस्था वक्फ ट्रस्ट (Waqf Trust) के पास है, जिसका नियंत्रण जॉर्डन (Jordan) के पास है. इजराइल यहां केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है.
यह वही मस्जिद है, जिसे लेकर वर्षों से यहूदी-मुस्लिम भिड़े हुए हैं. इनमें तनाव आए दिन हो जाता है. अनेक बार हिंसा भी हुई. इसकी वजह से शुरू हुई झड़पों में पूर्व में हजारों लोग मारे जा चुके हैं. ऐसे में यह प्राचीन इमारत एक बार फिर चर्चा में है, यह महत्वपूर्ण है प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, इनसे जुड़े सवाल किसी भी परीक्षा में आ सकते हैं. आइए इसके बारे में कुछ आधारभूत चीजें जान लेते हैं.
अल अक्सा मस्जिद क्या है?

  1. अल अक्सा मस्जिद यरूशलम शहर के बीच में स्थित है. यह जिस पहाड़ी पर है उसे अल-हराम अल शरीफ के नाम से जाना जाता है.
  2. इस परिसर में दो धार्मिक स्थल हैं. एक अल अक्सा मस्जिद और दूसरा डोम ऑफ द रॉक. कुरान में कहा गया है कि जिस चट्टान पर गुंबद स्थापित है, वहीं से मोहम्मद पैगंबर साहब ने जन्नत की यात्रा की थी. अल अक्सा का मतलब है प्रार्थना की सबसे दूर जगह. इसका निर्माण आठवीं शताब्दी में किया गया बताया जाता है.
  3. इस धर्म स्थल का निर्माण इब्राहिम, दाऊद, सुलेमान, इलियास और ईशा ने किया, जिन्हें कुरान में पैगंबर कहा गया है.
  4. अल अक्सा मस्जिद को यहूदी भी अपना सबसे पवित्र स्थल मानते हैं. वे इसे टेंपल माउंट कहते हैं. यहूदी मान्यता है कि तीन हजार साल पहले किंग सोलोमन ने यहाँ मंदिर निर्माण करवाया था. बाद में रोमनों ने उसे ध्वस्त कर दिया था.
  5. साल 1967 में अरब देशों से हुए जंग के बाद इजराइल ने इसके कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया था. आज यहाँ की दोनों इमारतों का संरक्षक कानूनी तौर पर जॉर्डन है. -परिसर की देखरेख को इस्लामिक वक्फ के सदस्यों के चुनाव में इजराइल की कोई भूमिका नहीं होती. इसे जॉर्डन ही तय करता है.
  6. इस परिसर में हर धर्म के लोग जा सकते हैं लेकिन इबादत या प्रार्थना करने की अनुमति सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों को ही है.
  7. यहूदी धर्मगुरु टेंपल ऑफ माउंट को इतना पवित्र मानते हैं कि उसमें कदम रखने को भी गलत मानते हैं. हालाँकि, यहूदी और ईसाई लोग सैलानी के तौर पर हफ्ते के पाँच दिन कुछ घंटों के लिए परिसर में जा सकते हैं.
  8. इस परिसर को लेकर विवाद इजराइल के जन्म से पहले से ही है. पर यह तूल पकड़ा है साल 1967 से, जब जंग के बाद इजराइल ने पूर्वी यरूशलम, गाजापट्टी आदि इलाकों पर कब्जा कर लिया. तब अल अक्सा मस्जिद वाला इलाका भी इजराइल ने अपना कहा.
  9. संयुक्त राष्ट्र ने साल 1947 में जब फ़लस्तीन और इजराइल दो देश बनाने को मंजूरी डी तो उस समय 55 फीसदी जमीन इजराइल और 45 फीसदी फ़लस्तीन को देने पर सहमति बनी.
  10. यरूशलम का वह इलाका जहाँ अल अक्सा मस्जिद है, उसे किसी को न देकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का घोषित कर दिया गया.
  11. साल 1967 में अल अक्सा परिसर जॉर्डन के कब्जे में था. इजराइल ने इसे उसी से छीना था. लेकिन तब एक समझौते के तहत व्यवस्था यह बनी कि इस परिसर के अंदरूनी हिस्से का नियंत्रण जॉर्डन के पास रहेगा और बाहरी सुरक्षा एवं अन्य इंतजमात इजराइल के पास रहेगा.
  12. साल 2000 में इजराइल के विपक्षी नेता शेरोन ने मस्जिद परिसर का दौरा किया और सार्वजनिक तौर पर कहा कि टेंपल माउंट हमारे कब्जे में है और आगे भी रहेगा. यह यहूदियों की सबसे पवित्र जगह है.
  13. शेरोन का यह बयान आग में घी का काम किया. उसके बाद भड़के विद्रोह में इजराइल-फ़लस्तीन के कई हजार लोग मारे गए.
  14. साल 2021 में मस्जिद परिसर के पास फिर हिंसक झड़प हुई जब फ़लस्तीन के लोगों ने कुछ लोगों को वहाँ से निकाले जाने का विरोध किया. इसमें कोई मौत तो नहीं हुई थी लेकिन बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.
  15. इसके बाद हमास ने यरूशलम पर लगातार रॉकेट दागे. यह संघर्ष कई दिनों तक चला. रमजान पर फिर झड़पें हुईं. और इस तरह यह रार अब इजराइल-हमास के युद्ध के रूप में दुनिया के सामने है.  

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