Navratri Vrat during periods: क्या आप पीरियड्स की वजह से नवरात्रि पूजा मिस कर रही हैं? ‘इन’ बातों का ज़रूर ध्यान रखें…..

Mon, Mar 23 , 2026, 10:30 PM

Source : Hamara Mahanagar Desk

Chaitra navratri pooja rules: जैसे-जैसे नवरात्रि का समय पास आता है, घरों में एक अलग ही एनर्जी महसूस होती है, घंटियों की आवाज़, दीयों की रोशनी और माता रानी के भजनों की गूंज महसूस होती है। लेकिन इस बीच, कई महिलाओं के मन में एक आम, लेकिन अक्सर अनकहा सवाल उठता है: अगर इन पवित्र दिनों में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें? क्या मुझे पूजा के दौरान इसे छोड़ देना चाहिए, या आस्था और नियमों को बनाए रखने का कोई तरीका है? यह सवाल सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि इमोशनल भी है। क्योंकि आस्था और परंपरा के बीच बैलेंस बनाना हर महिला के लिए आसान नहीं होता। आज हम इस टॉपिक पर आसान, प्रैक्टिकल और सेंसिटिव (Practical and Sensitive) तरीके से बात करेंगे। पहले, पीरियड्स के दौरान राहत पाने के मकसद से महिलाओं को पूजा से दूर रखा जाता था।

पीरियड्स के दौरान सुविधाओं की कमी थी, यह भी एक प्रैक्टिकल फैसला था। लेकिन धीरे-धीरे यह सोच एक सख्त परंपरा में बदल गई, जिसे आज भी कई घरों में बिना सवाल के माना जाता है। आज, शिक्षा और जागरूकता की वजह से यह सोच बदलने लगी है। अब इसे एक नेचुरल प्रोसेस के तौर पर देखा जाता है, किसी तरह की अशुद्धि के तौर पर नहीं।

अगर नवरात्रि के दौरान आपके पीरियड्स शुरू होते हैं, तो सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि आपकी आस्था और भावनाएं सबसे ज़रूरी हैं। पूजा का एक आसान तरीका अपनाया जा सकता है। एक तांबे की थाली या प्लेट लें। उसमें थोड़ी मिट्टी, दूध, हल्दी और कुमकुम मिलाकर देवी दुर्गा की एक छोटी मूर्ति या पिंडी बनाएं। यह प्रोसेस बहुत आसान है और इसमें ज़्यादा समय या मेहनत नहीं लगती। इसके बाद मूर्ति के सामने खीर, हलवा, पूरी या फल चढ़ाएं। साथ ही, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अगर समय कम है, तो सिर्फ़ मंत्र का जाप करना ही काफ़ी माना जाता है। अगर आप पूरे नौ दिन व्रत रख रही हैं, तो पहले दिन बनी मिट्टी की मूर्ति की रोज़ पूजा करें। इससे बार-बार पूजा की तैयारी करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और आपकी साधना भी बिना रुके चलती रहेगी।

अपने शरीर की सुनें: पीरियड्स के दौरान शरीर को आराम की ज़रूरत होती है। अगर आपको थकान या दर्द महसूस हो, तो पूजा को आसान रखें। छोटी और इमोशनल पूजा लंबे अनुष्ठानों से ज़्यादा असरदार होती हैं। मानसिक संतुलन बनाए रखें: कई बार महिलाएं समाज के दबाव के कारण परेशान हो जाती हैं। लेकिन यह ज़रूरी है कि हम अपने आराम और मन की शांति को प्राथमिकता दें। भरोसा दबाव नहीं, बल्कि आराम है।

पूजा कैसे पूरी करें?
नवरात्रि के आखिर में हवन करने के बाद मिट्टी की मूर्ति को गंगाजल या दूध में डुबोकर पीपल के पेड़ पर चढ़ा सकते हैं। यह एक पारंपरिक और सम्मानजनक तरीका है, जिससे पूजा का पूरा फल मिलता है। अगर मिट्टी की मूर्ति बनाना मुमकिन न हो, तो धातु की मूर्ति का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्य बात यह है कि आपकी आस्था सच्ची हो।

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