दावणगेरे। कर्नाटक में दावणगेरे दक्षिण के उपचुनाव में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) उम्मीदवार श्रीनिवास टी. दसकरियप्पा ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया और क्षेत्र में 'वंशवादी राजनीति' (Dynastic Politics) तथा पारिवारिक प्रभुत्व को चुनौती देने का संकल्प लिया। अपनी पत्नी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ पहुंचे श्री दसकरियप्पा ने बाद में शहर के दुर्गांबिका मंदिर से एक भव्य रोड शो निकाला। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, पूर्व मंत्री एम.पी. रेणुकाचार्य, अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribes) मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बंगारू हनुमंतू और दावणगेरे भाजपा जिला अध्यक्ष राजशेखर नगप्पा प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
कर्नाटक एसटी मोर्चा के उपाध्यक्ष और एक प्रमुख एसटी नेता श्री दसकरियप्पा अपना पहला चुनाव लड़ रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और दो दशकों से अधिक के पार्टी अनुभव के साथ वह राजनीति और प्रशासन दोनों की समझ रखते हैं। उनके पिता पहले दावणगेरे शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रह चुके हैं। अभियान को तब और मजबूती मिली जब 'इनसाइट्स आईएएस' के संस्थापक और स्वाभिमानी बालगा के अध्यक्ष जी.बी. विनयकुमार ने श्री दसकरियप्पा को अपना समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से हिंदू मत का ध्रुवीकरण कम हो सकता है, जिसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। श्री विनयकुमार ने कहा, "पारिवारिक राजनीति के खिलाफ मेरा रुख स्पष्ट है। इसलिए, मैं बिना किसी शर्त के श्रीनिवास दसकरियप्पा का समर्थन कर रहा हूं।"
इस उपचुनाव ने वंशवादी राजनीति पर बहस को तेज कर दिया है, क्योंकि कांग्रेस ने दिवंगत शमनूर शिवशंकरप्पा के पोते समर्थ मल्लिकार्जुन शमनूर को मैदान में उतारा है। इसे लेकर परिवार-केंद्रित टिकट वितरण की आलोचना हो रही है। कांग्रेस के भीतर भी कुछ मुस्लिम नेताओं ने असंतोष व्यक्त किया है। उनका दावा है कि लंबे समय तक समर्थन के बावजूद समुदाय की आकांक्षाओं को नजरअंदाज किया गया है। पार्टी के भीतर आंतरिक खींचतान भी सामने आई है, जहाँ अब्दुल जब्बार, एआरएम हुसैन और सादिक पहलवान जैसे नेता टिकट चयन में प्रभाव बनाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं वक्फ बोर्ड मंत्री जमीर अहमद खान ने अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के लिए जोर दिया था।
दूसरी ओर, भाजपा में टिकट वितरण को लेकर आंतरिक मतभेदों की अटकलों के बीच, वरिष्ठ नेता एम.पी. रेणुकाचार्य ने बी.एस. येदियुरप्पा खेमे को किसी भी झटके के दावों को खारिज करते हुए पार्टी की एकता पर जोर दिया। दावणगेरे दक्षिण का यह उपचुनाव कर्नाटक की राजनीति में एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जहाँ मुकाबला 'वंशवाद बनाम विकास' के रूप में देखा जा रहा है। सभी दल इस महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र में जाति और समुदाय के समर्थन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।



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