BRO Project Hirak: बीआरओ के प्रोजेक्ट हिराक ने 46 वर्ष पूरे किये, कुमाऊं और बस्तर कॉरिडोर को मिली मजबूती!

Sun, Feb 15 , 2026, 06:31 PM

Source : Uni India

नयी दिल्ली। सीमा सड़क संगठन (Border Roads Organisation) के प्रोजेक्ट हिराक ने रविवार को उत्तराखंड के टनकपुर में अपना 46वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर कुमाऊं क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) प्रभावित इलाकों में रणनीतिक संपर्क सुदृढ़ करने में परियोजना की अहम भूमिका का उल्लेख किया गया।

बीआरओ के प्रवक्ता के अनुसार, वर्षों में प्रोजेक्ट हिराक ने दुर्गम और सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत कर राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक आवागमन को नई दिशा दी है। परियोजना ने कैलाश मानसरोवर सात्रा 2025 के दौरान महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब पहली बार श्रद्धालु वाहनों से लिपुलेख दर्रे से मात्र 500 मीटर पहले तक पहुंच सके। भारी मानसून और भूस्खलन की चुनौतियों के बावजूद निरंतर सड़क रखरखाव और उन्नयन कार्यों से यात्रा सुगम बनाई गयी। विशेष कार्य बल (Special Task Force) के रूप में 15 फरवरी 1980 को स्थापित इस परियोजना ने शुरुआत में भारत कुकिंग कोल लिमिटेड के तहत धनबाद के कोयला क्षेत्रों में संपर्क मार्ग निर्माण का कार्य संभाला। बाद में इसका मुख्यालय नागपुर स्थानांतरित किया गया, जहां महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और भंडारा जिलों में कार्य किए गए।

फरवरी 2011 में परियोजना को उत्तराखंड के चंपावत स्थानांतरित किया गया और 11 नवंबर 2012 को मुख्यालय टनकपुर शिफ्ट हुआ। 15 फरवरी 2022 को इसे पूर्ण परियोजना का दर्जा देते हुए 'चीफ इंजीनियर (प्रोजेक्ट) हिराक' के रूप में उन्नत किया गया। कुमाऊं क्षेत्र में तवाघाट-गुंजी-लिपुलेख मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग डबल लेन (NHDL) मानकों के अनुरूप उन्नत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्र में गतिशीलता मजबूत हुई है। इसके अलावा, गुंजी–कुट्टी–जोलिंगकोंग सड़क का निर्माण दिसंबर 2024 में पूरा हुआ, जिससे व्यास घाटी के सीमावर्ती गांवों को बेहतर संपर्क मिला और पवित्र आदि कैलाश धाम तक पहुंच आसान हुई। इस विकास से रक्षा और अर्धसैनिक बलों की परिचालन क्षमता में वृद्धि के साथ सीमांत क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिला है।

छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित बस्तर क्षेत्र में भी प्रोजेक्ट हिराक ने कठिन परिस्थितियों में कार्य किए हैं। "श्रमेन सर्वं साध्यम" (कड़ी मेहनत से हर चुनौती संभव) के मंत्र के साथ परियोजना ने बीजापुर, सुकमा, कोंटा और नारायणपुर क्षेत्रों में 129 किलोमीटर सड़कों और 13 से अधिक पुलों के निर्माण का दायित्व संभाला है। दुर्गम नदियों और नालों पर पुल निर्माण सहित इन कार्यों की हर गतिविधि समन्वित और निगरानी व्यवस्था के तहत की जा रही है। प्रोजेक्ट हिराक के 46 वर्षों की यात्रा ने न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्गों को सशक्त बनाया है बल्कि दूरदराज़ क्षेत्रों में विकास की नयी संभावनाओं को भी साकार किया है।

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