Tirupati Balaji Story: एक बार ऋषियों ने त्रिदेवों (ब्रह्मा, शिव, विष्णु) में श्रेष्ठ का पता लगाने के लिए महर्षि भृगु को भेजा। भृगु पहले ब्रह्मा के पास गए, लेकिन वहां उन्हें कोई विशेष अनुभव नहीं हुआ, और वे आगे बढ़ गए।
फिर वे कैलाश पर शिव जी के पास गए। शिव जी ने उन्हें गले लगाना चाहा, लेकिन भृगु ने उन्हें अपमानित किया, जिससे शिव क्रोधित हो उठे, पर सती ने उन्हें शांत कराया। आखिरकार, भृगु बैकुंठ गए और विष्णु जी को लक्ष्मी जी की गोद में सिर रखकर सोते हुए पाया। भृगु ने बिना सोचे-समझे विष्णु की छाती पर लात मार दी।
ब्रह्मा और शिव से अपमानित होने के बाद, भृगु ने देखा कि भगवान विष्णु आराम कर रहे थे और देवी लक्ष्मी उनके साथ बातचीत कर रही थीं। क्रोध में आकर भृगु ने विष्णु की छाती पर लात मार दी। विष्णु ने अपनी नींद भंग होने पर भृगु के पैर को सहलाते हुए पूछा कि कहीं उनके पैर में चोट तो नहीं लग गई, क्योंकि उनका शरीर कठोर है।
भृगु ने पहले ब्रह्मा और शिव की परीक्षा ली, फिर विष्णु की छाती पर लात मारी, पर विष्णु ने शांत रहकर उनका सत्कार किया, जिससे वे लज्जित हुए और विष्णु को श्रेष्ठ घोषित किया, लेकिन बाद में पत्नी की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए विष्णु को श्राप दिया, जिससे विष्णु को राम-सीता और कृष्ण-राधा जैसे वियोग सहने पड़े।
लक्ष्मी जी का क्रोध:
लेकिन लक्ष्मी जी इस बात से बहुत क्रोधित हुईं कि उनके निवास स्थान (विष्णु की छाती) पर लात मारने के बावजूद विष्णु ने भृगु को दंड नहीं दिया। उन्हें लगा कि विष्णु ने उनका और अपने स्थान का अपमान सहन किया है।
वैकुंठ का त्याग:
इस घटना से निराश होकर देवी लक्ष्मी ने वैकुंठ छोड़ दिया और पृथ्वी पर आकर तपस्या करने लगीं, जिसके बाद भगवान विष्णु भी उन्हें मनाने के लिए पृथ्वी पर आए और वेंकटेश्वर के रूप में तिरुपति में विराजमान हुए।



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Thu, Jan 22 , 2026, 09:30 AM