Psychological Insights: साइकोलॉजिकल रिसर्च के मुताबिक, एक्सट्रोवर्ट लोगों के दिमाग में 'रिवॉर्ड सिस्टम' ज़्यादा एक्टिव होता है। उन्हें बातचीत से खुशी मिलती है, जिससे वे दूसरों से ज़्यादा बात करते हैं। रिसर्च के मुताबिक, बहुत से लोग चुप्पी से डरते हैं। वे चुप्पी से बचने के लिए लगातार बात करते हैं। इसे साइकोलॉजी में 'नर्वस टॉकिंग' कहा जाता है। यह आमतौर पर सोशल एंग्जायटी से होता है।
'अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर' ('Attention Deficit Hyperactivity Disorder') वाले बच्चों का 'इम्पल्स कंट्रोल' खराब होता है। उनके विचार उनके दिमाग में इतनी तेज़ी से आते हैं कि वे अपने शब्दों पर कंट्रोल नहीं कर पाते, इसे 'लोगोरिया' कहते हैं। नार्सिसिज़्म वाले लोग खुद को अहमियत देना चाहते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ऐसे लोग बातचीत पर कंट्रोल कर लेते हैं और सिर्फ़ अपने बारे में बात करके खुश महसूस करते हैं।
कुछ लोग 'वर्बल प्रोसेसर' होते हैं। यानी, जब तक वे ज़ोर से कुछ नहीं कहते, तब तक उन्हें कोई बात ठीक से समझ नहीं आती। उन्हें अपने विचार साफ़ करने के लिए बात करने की ज़रूरत महसूस होती है।
सुनने की कम क्षमता: साइकोलॉजी में इसे 'लिसनिंग डेफिसिट' कहते हैं। दिमाग, जो दूसरे व्यक्ति की बात सुनने के बजाय अपना जवाब तैयार करने में लगा रहता है, व्यक्ति को लगातार बात करने के लिए मजबूर करता है।
स्ट्रेस कम करने का तरीका: लगातार बात करने से दिमाग में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) का लेवल कम करने में मदद मिलती है। साइकोलॉजी यह भी कहती है कि दिमाग स्ट्रेस कम करने के लिए कम्युनिकेशन पर निर्भर करता है।
साइकोलॉजी में 'अप्रूवल सीकिंग' थ्योरी के अनुसार, कुछ लोग अपने होने को साबित करने या दूसरों का ध्यान खींचने के लिए बहुत ज़्यादा बात करते हैं।
बाइपोलर डिसऑर्डर या हाइपोमेनिया जैसी स्थितियों में सोचने की स्पीड इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति लगातार बात करने लगता है, यह रिसर्च से साबित हो चुका है।



Mahanagar Media Network Pvt.Ltd.
Sudhir Dalvi: +91 99673 72787
Manohar Naik:+91 98922 40773
Neeta Gotad - : +91 91679 69275
Sandip Sabale - : +91 91678 87265
info@hamaramahanagar.net
© Hamara Mahanagar. All Rights Reserved. Design by AMD Groups
Mon, Mar 23 , 2026, 10:30 AM