शोलापुर। महाराष्ट्र में शोलापुर शहर के शिवयोगी श्री सिद्धरामेश्वर महाराज (Shri Siddharameshwar Maharaj)को समर्पित सिद्धेश्वर मंदिर (Siddheshwar Temple) परिसर मकर संक्रांति के पहले ही भक्ति, आस्था और उत्सव के माहौल में डूब गया है। दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बड़ी संख्या में भक्तों के आने से मंदिर परिसर जीवंत हो उठा है। पवित्र मंदिर झील में स्थापित एक भव्य मूर्ति गुरु और शिष्यों के बीच गहरे बंधन और भक्ति के सार का प्रतीक है। यह भक्तों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है।
यह मूर्ति शिवयोगी श्री सिद्धरामेश्वर महाराज और उनके शिष्यों के बीच साझा आध्यात्मिक संबंध, बलिदान और भक्ति को दर्शाती है। शांत जल निकाय, हरी-भरी हरियाली, ऊंचे नारियल के पेड़ और नीले आसमान में बिखरे सफेद बादल आसपास की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं। मकर संक्रांति (Makar Sankranti) सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक है और इसे नवीनीकरण और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। भक्त इसी भावना को दर्शाते हुए सुबह से ही अभिषेक, आरती और विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर पहुंचने लगते हैं। परिवारों, संतों और शहर के बाहर से आए भक्तों की उपस्थिति ने मंदिर परिसर को जीवंत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है।
परिवारों, संतों और शहर के बाहर से आए भक्तों की उपस्थिति ने मंदिर परिसर को जीवंत और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। सिद्धेश्वर मंदिर का शोलापुर की विरासत में सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। मकर संक्रांति जैसे त्योहारों के दौरान आने वाले भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भक्तों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की है, जिससे त्योहार शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से मनाया जा सके।



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