शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने हफ्तों से चल रही असुविधा से प्रभावित चिकित्सा जगत और हजारों मरीजों को राहत देते हुए, आज इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला के वरिष्ठ रेजिडेंट (पल्मोनरी मेडिसिन) डॉ. राघव नेरुला की बर्खास्तगी रद्द कर दी। सरकार ने 22 दिसंबर को हुए डॉक्टर-मरीज के झगड़े की पुन: जांच के बाद नरम रुख अपनाया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी दो पृष्ठ के विस्तृत अधिसूचना में, सरकार ने पुनर्गठित जांच समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया है, जिसने निष्कर्ष निकाला कि यह घटना दोनों पक्षों के अचानक गुस्से के विस्फोट का परिणाम थी और इसके लिए केवल डॉक्टर ही जिम्मेदार नहीं थे। समिति ने डॉ. नेरुला द्वारा दी गई बिना शर्त माफी, उनके बेदाग सेवा रिकॉर्ड और उनके तथा मरीज अर्जुन के बीच हुए सुलह पर भी ध्यान दिया।
आदेश में कहा गया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक होनी चाहिए, विशेषकर दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को देखते हुए। तदनुसार, दिनांक 24 दिसंबर, 2025 का बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया गया है, जिससे डॉ. नेरुला को अपनी सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, सरकार ने डॉक्टर को पेशेवर आचरण, संयम और अनुशासन के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की चेतावनी दी है और कहा है कि दुर्व्यवहार की पुनरावृत्ति होने पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।



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