नयी दिल्ली: देश में फॉस्फोरस और पोटाश आधारित उर्वरकों (DAP and NPKs) उर्वरकों का उत्पादन 31 दिसंबर 2025 को समाप्त वर्ष में करीब 168.6 लाख टन रहा। यह वर्ष 2014 के करीब 112 लाख टन की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक सरकारी रिपोर्ट में दी गयी। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की पोषक तत्व (Union Ministry of Chemicals and Fertilizers) आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के माध्यम से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश तथा सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को प्रोत्साहित कर रहा। इसका दोहरा उदे्श्य है जिसमें से एक किसानों को किसी एक उर्वरक पर अत्यधिक निर्भरता से बचना और दूसरा उदे्श्य मृदा स्वास्थ्य बनाए रखना तथा खेत की उत्पादकता बढे।
सरकार रबी 2025–26 के लिए पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को स्वीकृति पहले ही प्रदान कर चुकी है जो अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी। ये दरें फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों पर लागू होंगी, जिनमें डीएपी तथा एनपीकेएस ग्रेड उर्वरक भी शामिल हैं। रबी 2025–26 के लिए अनुमानित 37,952 करोड़ रुपये की सब्सिडी की आवश्यकता है जो साल 2025 के खरीफ सीज़न की सब्सिडी की तुलना में लगभग 736 करोड़ रुपये अधिक है।
चालू रबी सीजन 2025–26 के लिए डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) पर सब्सिडी को बढ़ाकर 29,805 रुपये प्रति टन कर दिया गया है, जो रबी 2024–25 में 21,911 रुपये प्रति टन थी।
चालू रबी सीजन के लिए अमोनियम सल्फेट (घरेलू और आयातित दोनों) को भी एनबीएस योजना में शामिल किया गया है। एनपीकेएस (15-15-15-09) उर्वरक पर सब्सिडी प्रति टन 14,262 रुपये रखी गयी है। एनबीएस योजना के अंतर्गत आने वाला कोई भी पी एंड के उर्वरक, जो बोरॉन या जिंक से सुदृढ़ किया गया या लेपित हो (जैसा कि उर्वरक नियंत्रण आदेश में निर्दिष्ट है), उसे सब्सिडी मिलती रहेगी। इसके अतिरिक्त, इन सुदृढ़ किए गए या लेपित उर्वरकों को मुख्य पोषक तत्वों के साथ उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति मीट्रिक टन अतिरिक्त सब्सिडी भी प्रदान की जाएगी।
एनबीएस योजना के अंतर्गत पी एंड के उर्वरकों पर एक निश्चित सब्सिडी प्रदान की जाती है जिसे वार्षिक या अर्धवार्षिक आधार पर संशोधित किया जाता है। इसमें डीएपी भी शामिल है। सब्सिडी की राशि प्रत्येक उर्वरक ग्रेड में निहित पोषक तत्वों की संरचना से जुड़ी होती है। रबी 2023–24 तक डीएपी, एमओपी तथा एसएसपी जैसे 25 पी एंड के उर्वरक ग्रेड इस सब्सिडी योजना शामिल थे। खरीफ 2024 से तीन अतिरिक्त उर्वरक ग्रेडों को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है:
इनमें एनपीके (11:30:14) जिसे मैग्नीशियम, जिंक, बोरॉन और सल्फर से सुदृढ़ (फॉर्टिफाई) किया गया हो, यूरिया-एसएसपी (5:15:0:10) और एसएसपी (0:16:0:11) जिसे मैग्नीशियम, जिंक और बोरॉन से सुदृढ़ किया गया हो।
इन नए ग्रेडों के उर्वरकों के साथ, सरकार अब किसानों को अधिकृत निर्माताओं और आयातकों के माध्यम से 28 प्रकार के पी एंड के उर्वरक सब्सिडीयुक्त दरों पर उपलब्ध करा रही है। एनबीएस योजना के अंतर्गत, पी एंड के उर्वरक क्षेत्र एक असंयंत्रित प्रणाली के तहत कार्य करता है, जिससे कंपनियां उचित स्तर पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारित कर पाती हैं, बशर्ते कि सरकार इसकी निगरानी करे जिसके परिणामस्वरूप, किसान इन उर्वरकों की खरीद पर प्रत्यक्ष सब्सिडी का लाभ प्राप्त करते हैं। वर्ष 2022–23 से 2024–25 के दौरान पोषण आधारित सब्सिडी के लिए 2.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया था ताकि किसानों पर ऊर्वरकों की मंहगी लागत का बोझ न पड़े।



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Mon, Jan 05 , 2026, 03:36 PM